गायत्री मंत्र में छिपा है सभी परेशानियों का समाधान

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गायत्री मंत्र
gayatri mantra in hindi

सभी धर्म ग्रंथों में गायत्री मंत्र की महिमा को बताया गया है, सभी ऋषि-मुनि मंत्र का जाप करते थे यह मंत्र तीनों देव – ब्रह्मा,विष्णु और महेश का सार है।

चारौ वेदों से बने मंत्र का उच्चारण करने से हमारे जीवन में ऊर्जा का संचार होता है इस मंत्र का जाप करने से शरीर निरोग होता है और व्यक्ति को प्रसिद्धि,यश और धन की भी प्राप्ति होती है।

गायत्री मंत्र
ॐ भूर्भुवः स्वः
तत्सवितुर्वरेण्यं
भर्गो देवस्यः धीमहि
धियो यो नः प्रचोदयात्

मंत्र का अर्थ

सूर्य की स्तुति में गाया जाने वाला मंत्र स्वयं में ही दिव्य है इसका अर्थ निम्न है
उस प्राणस्वरूप, दुःखनाशक, सुखस्वरूप, तेजस्वी, पापनाशक, देवस्वरूप परमात्मा का हम अपने अंदर धारण करें, वह परमात्मा हमें सन्मार्ग पर प्रेरित करे.

मंत्र की शाब्दिक व्याख्या –

मंत्र में शुरुवात के शब्द भगवान के गुणों की व्याख्या करते हैं
ॐ – प्रणव
भूर – इन्सान को प्राण देने वाला
भुवः – दुखों का नाशक
स्वः – सुख का दाता
तत – वह
सवितुर – सूर्य की तरह उज्जवल
वरेण्यं – सबसे उत्तम
भर्गो – उद्धार करने वाला
देवस्य – भगवान
धीमहि – ध्यान योग्य
धियो – बुद्धि
यो – जो
नः – हमारी
प्रचोदयात् – हमें शक्ति दें (प्रदान करें).

गायत्री मंत्र का जाप कब करें

वैसे तो इस सरल मंत्र को कभी भी पढ़ा जा सकता है लेकिन शास्त्रों के अनुसार इसका जाप दिन में तीन बार करना चाहिए

मौन मानस‌िक जाप कभी भी कर सकते हैं लेक‌िन रात्र‌ि में इस मंत्र का जाप नहीं करना चाह‌िए। माना जाता है क‌ि रात में इस मंत्र का जाप लाभकारी नहीं होता है

  • प्रातः सूर्योदय के पहले से सूर्योदय के बाद तक
  • दोपहर के समय
  • सूर्यास्त से कुछ समय पहले जाप शुरू करना चाहिए.

गायत्री मंत्र जाप के फायदे

हिन्दू धर्म में गायत्री मंत्र का विशेष महत्व है. कई शोधों द्वारा यह भी प्रमाणित हुआ है कि गायत्री मंत्र के जाप से कई फायदे भी होते है जैसे कि मानसिक शांति, चेहरे पर चमक इन्द्रियों पर संयम होने के साथ ही गुस्सा कम आता है।